अमरीका कि नाक मे फंसा वेनेज़ूएला नाम का काँटा


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अमरीका कि नाक मे फंसा वेनेज़ूएला नाम का काँटा

आलेख - तस्नीम कौसर 

वेनेज़ूएला में सैन्य हस्तक्षेप एक विकल्प : डोनाल्ड ट्रंप के इस ब्यान के बाद दुनिया एक और नए सीरिया को बनते देखने जा रही है.
पश्चिमी देश वेनेज़ूएला के सोशलिस्ट नेता निकोलस मादुरो पर इस्तीफा देने का दबाव बना रहे हैं, डोनाल्ड ट्रंप 

सीरिया के तेल के भंडार खाली करने के बाद अब अमरीका कि नज़र वेनज़ुएला पे है ,अफ़ग़ानिस्तान मे भी उसकी नीतियों ने कोई ख़ास असर नहीं छोड़ा उल्टा उसके दाँत पहाड़ियों मे बसने वाले क़बायलियों ने खट्टे कर दिये ,अमरीका वहाँ से अपने फौजी वापस बुला रहा है ,सीरिया से भी निकलने का ऐलान कर चुका है लेकिन असमंजस में है। सेना को काम पे लगाए रखना भी अमरीका कि मजबूरी है और उसके अपने तेल के भंडार की साख उसकी दादागिरी को धक्का लगा रही है ,रूस ,टर्की ,ईरान और चाइना कि बढ़ती दोस्ती वेनज़ुएला की गिरती अर्थव्यवस्था तुर्की के साथ और सीरिया मे तुर्की का बढ़ता दबदबा भी उसकी बेचैनी का कारण है ,भारत ने भी अफ़ग़ानिस्तान मे लाइएब्रेरी बनवाने कि बात पर अमरीकी सदर ट्रंप द्वारा प्रधानमंत्री मोदी कि खिल्ली उड़ाने के बाद अपने सुर बदल लिए हैं जिसका नमूना वेनज़ुएला मे मादुरो के समर्थन से दिखा दिया गया है । अमरीका की पूरी कोशिश है की वो वेनज़ुएला मे अस्थिरता को बढ़ावा दे कर गृहयुद्ध को हवा दे।  हाल ही मे वेनज़ुएला के विपक्षी नेता गोइदो ने एक विरोध प्रदर्शन के दौरान ख़ुद को राष्ट्रपति घोषित कर दिया था। जिसके बाद अमरीका ने कहा था कि 'पूर्व राष्ट्रपति मादुरो' के पास अब कोई अधिकार नहीं हैं। अमरीका ने सेना से अपील की थी कि वे गुएदो का समर्थन करें। जिसके बाद मादुरो ने अमरीका से सभी संबंध तोड़ लिए हैं। इस तर्क से इंकार की कोई गुंजाईश नहीं है के अमरीका को जिस देश मे अपनी दादागिरी दिखाना मक़सद होता है वहाँ वो पहले आर्थिक अस्थिरता का हथकंडा अपना कर स्थानीय सत्ता पर दबाव बनाता है ,उस देश के लोगों मे विद्वेष कि जड़ों को मजबूत करता है इस काम मे उसका साथी इज़राइल अपने तमाम संसाधनों के जाल का उपयोग करता है और एक ब्लू प्रिंट पे विधिवत रणनीति के तहत काम चलता रहता है। टार्गेटेड देश मे अराजक स्थिति पैदा करने के लिए आम जनता तक हथियार सप्लाई करवाता है फिर स्थानिय मुद्दों पे जनता मे फूट डालता है साथ ही उस देश की सेना का महिमामण्ड्न करवाता है फिर देश मे गृहयुद्ध कि स्थिति पैदा करता है ,आतंकवाद का शगूफा छोड़ सेना को पंप कर के कभी राजनीतिक कभी सैन्य तख़्ता पलट करवाता है।स्थानीय आर्थिक संकट प्रत्यक्ष रूप से जनता को प्रभावित करती है इस लिए जनता बाहरी सहायता को अपने लिए वरदान समझती है फिर उस बहाने अमरीका जैसे अतिक्रमणकारी देश नैतिक सहायता की आड़ में घुसपैठ करते हैं और पैर जमाने के बाद अपना वास्तविक एजेंडा चलाते हैं। बता दें कि आर्थिक संकट से जूझ रहे वेनेज़ुएला के सदर मादुरो ने अमरीका की नाक मे दम कर रखा है क्यूंकि वो अपना तेल अपनी मर्ज़ी से दूसरे देशों को बेचना चाहता है जिसमें अमरीका रोड़ा बना हुआ है इस बात को यूं समझिए दुनिया के बाज़ार मे कच्चे तेल की कीमत डॉलर मुद्रा मे तय होती है ,कद्दाफ़ी ने सोने की मुद्रा उतारने का फैसला किया था ,अंजाम आप देख चुके।अमरीका कागज़ की अपनी करेंसी को किसी भी हालत मे डीवैल्यू नहीं होने देना चाहता क्यूंकी फिर उसके पास क्या बचेगा ?
इज़राइल द्वारा नियंत्रित और संचालित अंतराष्ट्रीय हथियार मंडी में हथियारों की खरीद फ़रोख़्त का बाज़ार गरम रखने के लिए दुनिया के किसी न किसी हिस्से मे जंग जारी रखना उसकी पॉलिसी  का हिस्सा है साथ ही अपने लिए तेल का प्रबंध भी करते रहना उसकी मजबूरी है। अमरीका वेनज़ुएला को सबक सिखा कर अपनी साख बचाने की फिराक मे है जबकि उसके खुद के देश मे सदी का सब से बड़ा वर्क शटडाउन पिछले हफ्ते गुज़रा है ये जंग कहाँ तक जायेगी इसकी धमक सुनाई दे रही है यानि दोस्त के दोस्त ,दोस्त और दुश्मन के दुश्मन के दो ब्लॉक आमने सामने दिखाई देने लगे हैं।दक्षिण अमेरिकी देश वेनेज़ुएला के विपक्ष के नेता जुआन ग्वाइदो द्वारा देश के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को सीधी चुनौती दिए जाने के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने उनका समर्थन कर दिया। ग्वाइदो को अमेरिका और ब्राजील,अर्जेंटीना और कोलंबिया समेत कम से कम 12 क्षेत्रीय ताकतों ने समर्थन दिया,जबकि रूस और चीन मादुरो के साथ हैं। मादुरो को तुर्की,मेक्सिको,क्यूबा और बोलोविया और इधर भारत का भी समर्थन प्राप्त है। गोइदो की अपील के बाद वेनेज़ुएला में बड़े पैमाने पर प्रदर्शन शुरू हो गए थे। ये हिंसक प्रदर्शन अब भी जारी हैं जिसमे दो दर्जन से ज़्यादा लोगों की मौत हो चुकी है। ट्रम्प ने ट्वीट किया, ‘पूरे वेनेजुएला में बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारी आज मादुरो के खिलाफ हैं। आज़ादी के लिए जंग शुरू हो गई है।’ ट्रम्प ने बताया कि उन्होंने स्व-घोषित कार्यवाहक राष्ट्रपति जुआन गुइडो से फोन पर बात करके ‘लोकतंत्र की पुन: स्थापना के लिए वेनेजुएला के संघर्ष में मजबूत अमेरिकी समर्थन’ को दोहराया। अब स्थिति ये है कि गोइदो को अमेरिका ने अंतरिम राष्ट्रपति के रूप में मान्यता दी है, लेकिन मादुरो को सेना और पुलिस का समर्थन हासिल है। उन्होंने गोइदो को अमेरिका के नेतृत्व में तख़्तापलट की कोशिश में शामिल बताया है। वेनेजुएला में सरकार समर्थक शीर्ष अदालत ने भी गोइदो के देश से बाहर जाने पर प्रतिबंध लगा दिया है। इस बीच कोलंबिया की सरकार ने मादुरो से जुड़े 200 से अधिक लोगों के प्रवेश पर पिछले बुधवार को रोक लगा दी है। द माइग्रेशन कोलंबिया’ ने कहा है कि यह निर्णय लीमा समूह द्वारा उठाए गए कदमों के तहत लिया है जो वेनेजुएला में शांतिपूर्ण समाधान चाहते हैं। मेक्सिको और उरुग्वे ने बुधवार को घोषणा की है कि वेनेजुएला में राजनीतिक संकट पर चर्चा के लिए उन देशों और संस्थाओं का अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन बुलाया जाएगा जिनका तटस्थ रुख है। दोनों देशों ने गोइदो को मान्यता नहीं दी है। यह सम्मेलन मोंटेवीडियो में सात फरवरी को होगा।बयान में कहा गया है कि यह निर्णय वार्ता शुरू करने की संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुतारेस की अपील पर लिया गया है। दोनों देशों को इस सम्मेलन में 10 देशों और संस्थाओं के भाग लेने की उम्मीद है । .खास बात ये है कि देश की शक्तिशाली सेना 56 वर्षीय समाजवादी नेता निकोलस मादुरो के प्रति अब तक वफादार बनी हुई है.

मेक्सिको और उरुग्वे ने बुधवार को घोषणा की है कि वेनेजुएला में राजनीतिक संकट पर चर्चा के लिए उन देशों और संस्थाओं का अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन बुलाया जाएगा जिनका तटस्थ रुख है। दोनों देशों ने गोइदो को मान्यता नहीं दी है। यह सम्मेलन मोंटेवीडियो में सात फरवरी को होगा।

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