क्या आप को भी लगता है के बुलन्दशहर की घटना पूर्व नियोजित है ??


Asian Reporter Mail

विगत लोकसभा चुनाव से पहले वर्ष 2013 के अगस्त में पश्चिमी उत्तर प्रदेश के मुज़फ़्फ़रनगर में एक समुदाय विशेष की लड़की छेड़खानी को तात्कालिक कारण बना कर भीषण सम्प्रदायिक दंगे भड़काए गए और लोकसभा चुनाव में भाजपा ने 80 लोकसभा सीटों वाले उत्तर प्रदेश में 71 सीटें जीतीं जिसका मुख्य कारण धार्मिक आधार पर मतों का विभाजन और ध्रुवीकरण था। ये बात देश के तमाम बड़े राजनैतिक विश्लषकों ने स्वीकार किया के भाजपा को लोकसभा में इतनी बड़ी सफ़लता के पीछे सांप्रदायिक ध्रुवीकरण एक बड़ा मज़बूत आधार रहा है।विगत चुनाव में कांग्रेस के दस वर्षों के शासन और उसमें व्याप्त भ्रष्टाचार भी एक मुद्दा था और कांग्रेस से लोग ऊब भी चुके थे जिसके नतीजे में भाजपा को कुछ प्रतिशत मत मिले।सामने एक बार फिर लोकसभा चुनाव है और इस बार न तो कांग्रेस के भ्रष्टाचार को मुद्दा बनाया जा सकता है न अपने पास 5 सालों के अंदर किये गए कोई ऐसे कारनामे हैं जिनको सामने रख कर जनता की अदालत में जाया जाए। 2014 की मोदी लहर का दूर दूर तक पता नही है बल्कि आमसभा चुनावों के बाद हुए तमाम उपचुनावों में गुजरात के बाहर भाजपा को हार का सामना करना पड़ा है। उत्तर प्रदेश की परंपरागत भाजपाई सीट योगी के मुख्यमंत्री बनने के बाद भाजपा गंवा चुकी है। अभी राजस्थान, मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ में चुनाव के परिणाम आने वाले हैं और विश्लेषकों और स्वयं भाजपा के आंतरिक सर्वे के अनुसार भाजपा राजस्थान से साफ़ होने जा रही है जबकी मध्यप्रदेश में भी कांटे की टक्कर है। सामने जो परिस्तिथि दिख रही है वो स्पष्ट करती है के लोकसभा चुनाव में इतनी आसानी से कामयाबी नही मिलेगी। नोटबन्दी, जीएसटी, किसान सभी कुछ विपक्ष के पास एक आक्रामक हथियार की तरह रहेंगे तो अब ऐसे में एकमात्र सफ़लतामन्त्र धार्मिक आधार पर मतों का विभाजन ही है जो शायद नैय्या पार लगा दे।
3 दिसम्बर 2018 को बुलन्दशहर में जो घटना हुई वो अभी तक मिले तमाम कड़ियों के आधार पर पूर्व नियोजित और पूरी रणनीति के साथ एक बड़े साम्प्रदायिक दंगे की योजना को सामने लाती है
क्या ये महज़ इत्तेफ़ाक़ है के घटना वाले दिन से कई रोज़ पहले से देश भर से मुसलमान उस वक़्त बुलन्दशहर में जमा थे और जिस दिन घटना हुई थी वो वहां आयोजित धार्मिक आयोजन का अंतिम दिन था।
महाव गावँ में घटना स्थल पर पहुंचने वाले अधिकारियों में तहसीलदार राजकुमार भास्कर भी हैं जिनके एक निजी चैनल से बातचीत के अनुसार अनुसार "गाय कर मांस को गन्ने के खेत मे लटकाया गया और गाय के सर और चमड़ी को इस तरह लटकाया गया जैसे हैंगर में कपड़े लटकाए जाते हैं। लटकाते वक़्त इसका भी ध्यान रखा के वो दूर से दिखाई दें। 
क्या कोई गौ कशी करने वाला इस तरह गौ वध के बाद इस तरह उसका प्रदर्शन करेगा ??? 

उसके बाद घटना स्थल पर पहुंच कर गाय का मांस देखने वाले बजरंग दल और भाजयुमो के कार्यकर्ता ही थे
ये भी महज़ एक संयोग हो सकता है ???
आसपास मौजूद एक ग्रामीण के अनुसार घटना से एक दिन पहले वहां कोई मांस नहीं था और न ही उन्होंने मांस काटने वाले किसी भी व्यक्ति को वहां देखा है जबके वो उसी गन्ने के खेत के ठीक सामने रहते हैं जहां मांस लटकाया गया था। मांस की खबर फैलते ही हिंदू युवा वाहिनी,शिवसेना और बजरंग दल के सदस्यों का घटना स्थल पर तुरंत पहुंचना, प्रदर्शन शुरू करना,भड़काऊ नारेबाज़ी करना,जानवर के कटे अवशेषों को एक गाड़ी पर लाद कर विरोध के लिए बुलंदशहर-गढ़मुक्तेशवर राज्य राजमार्ग की ओर ले जाने की कोशिश करना, जिस रास्ते मे विगत तीन दिनों से आयोजित दूसरे धर्म के आयोजन के समापन के बाद लोगों को वापस लौटना था।
क्या ये सबसे बड़ा सन्देह पैदा नहीं करता ???

गावँ के पूर्व प्रधान का कहना है के अनुसार पुलिस ने हमें आश्वासन दिया था के वो दोषियों के विरुद्ध करवाई करेगी लेकिन बजरंग दल वाले नहीं माने और और ट्रैक्टर पर क़ब्ज़ा कर लिया। गावँ के प्रधान के अनुसार ही
पथराव अचानक शुरू हुआ और पथराव करने वाले बाहर से आये थे

क्या इस बात को नज़र अंदाज़ किया जा सकता है ???

बजरंग दल के ज़िला संयोजक योगेश राज की तरफ़ दर्ज कराई गई प्राथमिकी में दो नाबालिग़ बच्चों सहित 4 अन्य लोग फ़र्ज़ी पाए गए हैं इसका क्या अर्थ हो सकता है ???

शहीद इंस्पेक्टर सुबोध कुमार का पूरा परिवार उनकी हत्या को सुनियोजित क़रार दे रहा है और लगातार ये कहा जा रहा है के शहीद इंस्पेक्टर सुबोध सिंह दादरी में हुएख़लाक़ हत्याकांड के जांच अधिकारी थे और उन्हें लगातार धमकियां मिल रही थीं।
क्या शहीद इंस्पेक्टर के परिवार द्वारा इतने गंभीर आरोप को इस घटना से अलग किया जाना चाहिए ???

ऐसे दर्जनों और सवाल हैं जो बुलंदशहर की घटना को कहीं न कहीं पूर्व नियोजित होने की तरफ इशारा कर रहे हैंप्रदेश के आला अधिकारीयों के साथ घटना की समीक्षात्मक बैठक में भाजपा सरकार के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा इंस्पेक्टर सुबोध कुमार सिंह की हत्या का संबंध में उदासीनता और गौ कशी के संबंध में कठोर करवाई के निर्देश भी कहीं न कहीं इस संदेह को बल देते हैं की बुलन्दशहर की घटना शायद अंतिम नहीं होगी

बहरहाल इस वीभत्स्तम दौर में जनता के ऊपर एक बड़ी ज़िम्मेदारी है के वो किस तरह देश और प्रदेश के अंदर शान्ति अम्न और सुकून के वातावरण को स्थापित करने में अपनी भूमिका सुनिश्चित करती है।

3 दिसम्बर 2018 को बुलन्दशहर में जो घटना हुई वो अभी तक मिले तमाम कड़ियों के आधार पर पूर्व नियोजित और पूरी रणनीति के साथ एक बड़े साम्प्रदायिक दंगे की योजना को सामने लाती है

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