मौलाना मोहम्मद अली ज़ौहरः वह महान स्वतंत्रता सेनानी जिनकी क़ुर्बानी को भुला दिया गया।


Asian Reporter Mail

तौहीद तो यह है कि ख़ुदा हश्र में कह दे

यह बंदा दो आलम से ख़फ़ा मेरे लिए है

मौलाना मोहम्मद अली जौहर की यह शायरी सिर्फ़ उन्हीं दिनों का नतीजा है, जब वह जेल में थे. ख़ाली समय में जबकि उन पर हर तरह कीपाबंदी लगी थी, लेकिनदिल और दिमाग़ पर भला कौन पाबंदी लगा सकता है. मौलाना मोहम्मद अली जौहर के जीवन परअगर नज़र डालें तो भारतीय इतिहास में उनका सबसे बड़ा कारनामा ख़िलाफ़त तहरीक है.यह वह तहरीक थी, जोतुर्की के मुसलमानों के समर्थन में शुरू की गई थी, लेकिन बाद में इसने भारतीय स्वतंत्रता संग्राम का रूप धारणकर लिया. यही वह प्लेटफार्म था, जहां से महात्मा गांधी ने अपनी राजनीतिक शुरुआत की. ख़िलाफ़ततहरीक ने हिंदुओं और मुसलमानों को अंग्रेज़ों के विरुद्ध ला खड़ा किया. दोनों हीसंप्रदायों ने बड़े जोश और जज़्बे के साथ अंग्रेज़ों के ख़िला़फ कड़े क़दम उठानेशुरू किए,ताकि भारत को आज़ाद कराया जा सके. इसके लिए मौलाना ने हरतरह की यातनाएं सहीं. वह मरते दम तक अंग्रेज़ों से इस बात के लिए लड़ते रहे कि यातो देश आज़ाद करो या फिर मरने के बाद दो गज़ ज़मीन अपने देश में दे दो. वह किसीगुलाम देश में मरना नहीं चाहते थे. इतिहास गवाह है कि उन्होंने अपना वचन पूरा करके दिखा दिया.
एक पत्रकार की हैसियत से मौलाना ने एक महान कारनामा अंजाम दिया. उन्होंने दोअख़बार निकाले कामरेड और हमदर्द. कामरेड अंग्रेज़ी का अख़बार था, जबकि हमदर्द उर्दू का. कामरेड एक ऐसा अंग्रेज़ी अख़बार था, जिसका लोहा अंग्रेज़ भी मानते थे. उसके महत्व का अनुमान इसीबात से लगाया जा सकता है कि अंग्रेज़ कामरेड की कॉपी अपने दोस्तों के लिए बतौरतोहफ़ा लंदन ले जाते थे. इस अख़बार को निकालने का मक़सद दरअसल अंग्रेज़ों कोभारतीय जनता की समस्याओं से अवगत कराना था. दूसरा अख़बार हमदर्द था, जिसे मौलाना जौहर ने भारतीय जनता और ख़ासकर मुसलमानों केप्रशिक्षण और शिक्षा के लिए निकालना शुरू किया था. मौलाना का यह सिद्धांत था किकोई भी ख़बर बिना प्रमाण के प्रकाशित न की जाए. मौलाना अख़बार में विज्ञापन छापनेके कड़े विरोधी थे. अगर वह चाहते तो ऐसा करके बहुत पैसा कमा सकते थे, लेकिन उन्होंने आर्थिक लाभ के बजाय पत्रकारिता केसिद्धांतों को वरीयता दी.
हम यह कह सकते हैं कि मौलाना जौहर ने साहित्य, राजनीति एवं पत्रकारिता के क्षेत्र में जो कुछ भी विरासत छोड़ी, उसे नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता. उनके बिना भारतीय इतिहास पूरा नहीं हो सकता. ज़रूरत इस बात की है कि उन पर पुन: अध्ययन किया जाए और मौलाना को उनका सही मुक़ाम दिया जाए. मौलाना मोहम्मद अली जौहर एक महान स्वतन्त्रता सेनानी, जिसे भुला दिया गया. ये कम बड़ा हादसा नहीं है के कल उनकी यौम ए पैदाइश पर दक्षिणपंथी राजनैतिक दलों की बात तो ख़ैर करना ही बेकार है लेकिन स्वयंभू तथाकथित सेक्युलर कहे जाने वाली पार्टियों और नेताओं ने भी उन्हें फ़रामोश कर दिया है 

लेख -अली ज़ाकिर 

ये कम बड़ा हादसा नहीं है के कल उनकी यौम ए पैदाइश पर दक्षिणपंथी राजनैतिक दलों की बात तो ख़ैर करना ही बेकार है लेकिन स्वयंभू तथाकथित सेक्युलर कहे जाने वाली पार्टियों और नेताओं ने भी उन्हें फ़रामोश कर दिया है

You May Also Like

Notify me when new comments are added.

ट्रेंडिंग/Trending videos

मुद्दा गर्म है

नज़रिया

एशिया