इस्राईल गज़्ज़ा में नये टकराव की तैयारी कर रहा है।


Editor :tasneem kausar

अरब जगत के विख्यात लेखक व टीकाकार  अब्दुल बारी अतवान कहते हैं :

 हाल ही में गाजा पट्टी पर इज़राईली  हवा’ई हमले  में दो गर्भवती महिलाओं और दो शिशुओं सहित कम से कम 25 फिलिस्तीनियों की मौ’त हो गई है , और 100 से अधिक अन्य घायल हो गए हैं ।

Image result for ghaza

इस्लामी जेहाद आंदोलन के महासचिव ज़्याद अन्नुख़ाला ने अलमयादीन के साथ एक वार्ता में खुल कर कहा है कि कुछ दिनों पहले गज़्ज़ा में जो टकराव हुआ है वह वास्तव में युद्धाभ्यास था और अगली गर्मियों में महायुद्ध की तैयारी के लिए यह टकराव हुआ था।

इस्राईली प्रधानमंत्री नेतेन्याहू ने गज़्ज़ा में हालिया झड़प के बाद इस्राईली जनरलों के मध्य कहा था कि टकराव अभी ख़त्म नहीं हुआ है ... इस्राईल गज़्ज़ा में नये टकराव की तैयारी कर रहा है।

हमास को वैसे भी इस बात में संदेह है कि नेतेन्याहू, युद्ध बंदी की शर्तों का पालन करेंगे विशेषकर, घेरांबंदी में ढील, मछली के शिकार के लिए 15 मील तक जाने की अनुमति और क़तर की सहायता को गज़्ज़ा तक पहुंचने देने जैसी बातों को स्वीकार करने की संभावना बहुत कम है। समझा यह जा रहा है कि  इस्राईल ने युद्धंबदी के लिए यह सब शर्तें इस लिए स्वीकार की हैं क्योंकि उसे थोड़ा सा समय चाहिए था ताकि शांति के साथ नयी सरकार का गठन हो और यूरोवीजन फेस्टिवेल के आयोजन में कोई बाधा न हो।

 यदि ग़ज़्जा पट्टी पर इस्राईल कोई और हमला करता है तो इसका भारी ख़मियाज़ा चुकाना पड़ेगा जानी और माली दोनों नुक़सान होना तय है। बल्कि यह कहना चाहिए कि अब इस्राईल को जो नुक़सान उठाना पड़ेगा वह बहुत अधिक होगा। उससे भी बहुत अधिक जो वर्ष 2006 में लेबनान पर इस्राईल के हमले में हुआ था। वैसे भी इस्राईल इस युद्ध में अपना एक भी लक्ष्य पूरा नहीं कर पाया था। हिज्बुल्लाह लेबनान के मिसाइलों ने इस्राईल में तहलका मचा दिया था।

प्रतिरोधक संगठनों को अच्छी तरह पता है कि यदि इस्राईल ग़ज़्जा पट्टी पर कोई हमला करता है तो इसका लक्ष्य होगा फ़िलिस्तीनी प्रतिरोधक संगठनों को मिटा देना इसी लिए यह संगठन पूरी ताक़त से  लड़ रहे हैं और अपने पास मौजूद सारे संसाधन और हथियार प्रयोग कर रहे हैं। इनमें अलग अलग रेंज के मिसाइल शामिल हैं।

हमास के पोलित ब्योरो के सदस्य ख़लील हैया ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि अब जब हमारे मिसाइल 40 किलोमीटर की दूरी तक पहुंच  रहे हैं और उसदूद तथा असक़लान जैसी ज़ायोनी बस्तियों को निशाना बना रहे हैं तो नेतनयाहू हर झड़प के दौरान किसी मध्यस्थ की तलाश में दौड़ पड़ते हैं। जेहादे इस्लामी संगठन की सैनिक शाखा के प्रवक्ता अबू हमज़ा ने बताया कि उनके संगठन ने इस बार की झड़प में बद्र-3 मिसाइल का अनावरण किया जो बड़े सटीक रूप से अपने निशाने को ध्वस्त करता है और भारी विनाशकारी क्षमता से लैस है। शायद इस बयान में अबू तारिक़ के उस बयान का अर्थ भी निहित है जिसमें उन्होंने कहा कि यदि झड़प एक दिन और जारी रहती तो हमारे मिसाइल तेल अबीब तथा अन्य शहरों पर बरसने लगते।

फ़िलिस्तनी संगठनों ने आख़िर के दो दिन की लड़ाई में 690 मिसाइल फायर किए। इस्राईली सेना का कहना है कि इनमें से केवल वह 240 मिसाइलों को हवा में ध्वस्त कर पायी। इसका मतलब यह है कि इस्राईली आयरन डोम 450 मिसाइलों को इंटरसेप्ट करने में नाकाम रहा और यह मिसाइल अपने निशाने पर लगे। इसीलिए इस्राईलियों में भय फैल गया और लाखों ज़ायोनी अपने घर बार छोड़कर उत्तरी शहरों की ओर भागे।

इसका मतलब साफ़ है कि डील आफ़ सेंचुरी कामयाब होने वाली नहीं है इसलिए नहीं कि उसकी विषयवस्तु बहुत बुरी है बल्कि इसलिए कि ग़ज़्ज़ा पट्टी और पश्चिमी तट दोनों ही इलाक़ो में साहसी राष्ट्र मौजूद है। अब तक इस्राईल ने इस डील के बारे में जो रिपोर्टें लीक हैं सब यह जानने के लिए थीं कि फ़िलिस्तीनियों की प्रतक्रिया क्या होगी।

इस्राईल ने गज़्ज़ा पट्टी और पश्चिमी तट पर क़ब्ज़ा किया और इस क़ब्ज़े के नतीजे में उसे अपमानित होकर वहां से निकलना पड़ा अब वह दोनों ही इलाक़ों में और बड़े अपमान का सामना करने वाला है। डील आफ़ सेंचुरी इस इलाक़े में आग लगा देगी।

फ़िलिस्तीनी क्रान्ति अपने रास्ते पर आगे बढ़ रही है और इस समय उसकी ताक़त पहले से कहीं अधिक है। नेतनयाहू का अंत ग़ज़्ज़ा पट्टी में होगा जिस तरह ओलमर्ट का अंत लेबनान में हुआ था।

अब इस्राईल को जो नुक़सान उठाना पड़ेगा वह बहुत अधिक होगा। उससे भी बहुत अधिक जो वर्ष 2006 में लेबनान पर इस्राईल के हमले में हुआ था।

You May Also Like

Notify me when new comments are added.

ट्रेंडिंग/Trending videos

मुद्दा गर्म है

नज़रिया

एशिया

ब्रिटेन में हाउस ऑफ कॉमन्स की नेता एंड्रिया लेडसम ने मंत्रिमंडल से दी इस्तीफ़ा

एंड्रिया लेडसम ने ऐसे वक्त में इस्तीफा दिया है जब कंज़रवेटिव सांसद प्रधानमंत्री टेरीज़ा मे की ब्रेक्ज़िट योजना का ज़ोरदार विरोध कर रहे हैं. प्रधानमंत्री टेरीज़ा मे के इस्तीफे की भी मांग की जा रही है. कई कैबिनेट मंत्रियों ने बीबीसी से कहा कि प्रधानमंत्री अब अपने पद पर नहीं रह सकती हैं.